
[ 22- आश्विन शुक्ला पापांकुशा एकादशी ]
इतनी कथा सुनने के बाद युधिष्ठिर ने कहा कि आप आश्विन शुक्ला एकादशी की कथा का वर्णन कीजिए। भगवान बोले-यह एकादशी अभीष्ट फल देने वाली तथा मोक्ष को प्राप्त कराने वाला है। जो मानव नीच कर्मों से दूर रहकर मन व इन्द्रियों को वश में करते हुए इस एकादशी का व्रत करता है वह अनेक पीढ़ियों तक अपने परिवार के साथ सुख भोगता है। हे धर्मराज! इस व्रत के बाद ब्राह्मण भोज कराकर उन्हें धन, वस्त्र, पात्र, अन्न, गौ और भूमि दान करता है । वह कभी भी नर्क को प्राप्त नहीं होता, सदा श्रेष्ठ । योनि को प्राप्त कर अनन्त सुखों को भोगता है इसलिए सुख चाहने वालों को चाहिए कि वे अपना समय व्रत, इ उपवास, अन्नदान आदि धार्मिक कार्यों में ही लगावें। जो कोई इस व्रत को विधिपूर्वक करेगा वह सब दुखों से मुक्त होकर स्वर्ग के आनन्द को प्राप्त करेगा।
[ 23-कार्तिक कृष्णा रमा एकादशी ]
धर्मराज ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि हे भगवन! अब आप रमा एकादशी की कथा का वर्णन कीजिए।भगवान बोले-प्राचीन काल में एक नगर में मुकुन्द नामक राजा राज्य करता था उसकी प्रजा भी उसको बहुत चाहती थी। वह यज्ञ-तप, उपवास व्रतादि में बहुत श्रद्धा रखता था विधिपूर्वक व्रत करके एकादशी को सारी प्रजा से व्रत करवाया करता था। उस दिन वह पशुओं को चारा नहीं खिलाता था। राजा के चन्द्रप्रभा नामक एक कन्या थी। जिसका विवाह राजा चन्द्रसेन के पुत्र शोभन के साथ हुआ था। शोभन एक दिन अपनी सुसराल गया उसके कुछ दिन बाद ही कार्तिक की रमा एकादशी का व्रत आने वाला था इसलिए शोभन की स्त्री चन्द्र प्रभा ने कहा अपने गाँव को चले -जाओ क्योंकि एक-दो दिन बाद एकादशी का व्रत आने - वाला है मेरे पिता की आज्ञा है कि इस दिन सारी-प्रजा व्रत करे जो नहीं करता है वह भारी दण्ड को पाता है। आप व्रत करके भूख-प्यास सहन नहीं कर सकोगे। - इसलिए यहाँ से चले जाना ही ठीक है शोभन ने कहाकि मैं यहीं रहकर व्रत करूँगा । एकादशी के दिन - शोभन ने व्रत किया और भूख-प्यास न सह सकने के कारण वह मर गया। इस व्रत के प्रभाव से मरने पर शोभन मन्द्राचल पर्वत का राजा बन गया। !
एकादशी-की कथा का वर्णन ekadashi vrat ki katha
एक दिन एक ब्राह्मण घूमता हुआ मन्द्राचल पर्वत र पहुंचा, तब उसने शोभन से राजा बनने का कारण पूंछा ? शोभिन ने कहा-मैंने अपनी ससुराल में एकादशी का व्रत किया था। उसके प्रभाव से ही यह सब ही शोभन ने कहा यदि मेरी रानी चन्द्रप्रभा एकादशी का व्रत करके उसका पुण्य मेरे अर्पण कर दे तो वह मटो प्राप्त हो जायेगा और हमारा राज्य स्थिर हो जाम ब्राह्मण ने जाकर रानी को सब हाल कहा उसने रमा-एकादशी का व्रत किया और उसका फल अपने पति को अर्पण कर दिया। व्रत के प्रभाव से प्राप्त हो गई व उनका राज्य स्थिर हो गया। इस व्रत के प्रभाव से सब सुखों के साथ राज्य प्राप्त होता है।
एकादशी-की कथा का वर्णन ekadashi vrat ki katha