बलहीनता कैसे आती है,वीर्यवर्द्धक उपाय,
Ejaculatory remedy
बलहीनता कैसे आती है;
जो युवक बुरी सोहबत में पड़कर 20 वर्ष के पूर्व ही अपने इस कीमती वीर्य को नष्ट करने लगते हैं वह कई ऐसे रोगों के शिकार हो जाते हैं जिनसे छुटकारा जीवन पर्यन्त तक नहीं छूटता, आगे चलकर उनका शरीर व्याधियों का घर बन जाता है। उनका सारा सुख आनन्द जाता रहता है। अतः शास्त्र की आज्ञानुसार 25 वर्ष से पूर्व वीर्य नष्ट नहीं करना चाहिये। पर स्त्री गमन तो अत्यन्त निन्दनीय है। उस समय लज्जा और भय रूपा डाकनी उसे आकर घेर लेती है जो कि दिल का कमजार कर देती है जिसका प्रभाव पूरे शरीर पर होता है। वैश्यागमन और हस्त मैथुन व अन्य बेकार के मैथुन तो और भी निन्दनीय हैं। वेश्याओं के पास सब तरह के मनुष्य जाने से उनकी योनि में अधिकतर कई छूत वाले रोग (एड्स) लग जाते हैं। जब कोई नया पुरुष उनके पास जाता है तो वह भी अपने साथ उपहार में ये रोग ले आता है। वैश्यायें किसी के प्रेम की भूखी नहीं बल्कि पैसों की भूखी होती हैं। दूसरे कुकर्म कई कामुक लज्जावश ऐसी वैश्याओं अथवा व्यभिचारिणी स्त्रियों के पास तो नहीं जाते परन्तु वीर्य स्खलित होने के समय जो मजा मिलता है उसे लेने की उन्हें लत पड़ जाती है और वे कई अप्राकृतिक तरीकों से वीर्य नष्ट कर डालते हैं। हस्त मैथुन और गुदा मैथुन में फंसने वाले यही मूर्ख होते हैं। इसके लिये क्या कहा जाये इनका तो जीवन ही मारा जाता है। सूखे और चिपके हुये गाल बैठी हुई आंख आज के नवयुवकों की दर्द भरी कहानी कह रही है। वास्तविक सहवास और हस्त मैथुन में अन्तर है स्त्री सहवास में जैसे ही पुरुष स्खलित होता है ठीक उसी समय स्त्री रज छोड़ती है। जिससे क्षीण हुई शक्ति का कुछ अंश मनुष्य को वापिस प्राप्त हो जाता है जिससे मैथुन के समय जब स्खलित होने के बाद नसों का खून वापिस जाता है तो नसों में उस समय वायु मण्डल की ठण्डी हवा प्रवेश करके स्नायु मण्डल को कमजोर बना देती है। फलतः अधिकतर हस्त मैथुन करने वालों का लिंग टेढ़ा पड़ जाता है। हाथ की रगड़ और गर्मी को वीर्य में पाये जाने वाले शुक्राणु सहन नहीं कर सकते और वे मर जाते हैं। अतः ऐसे कुकर्मी संतान पैदा करने योग्य नहीं रहते और अपने किये हुये पापों पर रोते हैं अतः इसकी लत पर हमें अपने कीमती वीर्य को नष्ट नहीं करना। बड़े दुःख का विषय है कि जो पदार्थ शरीर रूपी कारखाने में बहुत मूल्यवान वस्तुआ से 40 दिन में निर्माण होता है, उसे आप अनावश्यक मूत्र से बहने वाली गन्दी नाली में बहाकर नष्ट कर डालतेहैं।
वीर्यवर्द्धक उपाय;
वीर्य ही वजू है अतः शक्तिवान बनने के लिये वीर्यवान होना आवश्यक है। अतः अब हम ऐसी औषधियां बतायेंगे जिनका सीधा असर वीर्य बनने के लिये होता है। वीर्य निर्माण करने वाली जड़ी बूटियां साधारणतया इस प्रकार हैं - आंवला, सौंठ, मस्ती महूली, सफेद व स्याही, सितावर, गोखरू, ताल मखाना, कोंच के बीज, खालिस मिश्री, बीजबन्द, बल अतिबला, शहपुष्पी, बरगद का दूध, तीसरी सफेद व स्याही, वहम्मन सफेद व स्याह, लालबनी के बीज, छुआरा, बादाम, दूध, पनीर, मक्खन मिश्री, शिलाजीत, काली गाजर, उड़द की दाल, अरबी, सिंगाड़ा, इमली के बीजों की मिगी, पीपल की जटायें, बेल के कोंपल, बबूल की फली, गुड़हल का फूल, मुनक्का, किशमिश, चिलगोजे की मिगी, भिण्डी, करमकल्ला।
(नपुंसकता नाशक योग)
नुस्खा नं. 1 मूसली सफेद 5 ग्राम जो कुटी हुई हो 40 ग्राम खोलते हुए दूध में भिगोयें और ढंककर रख दें। 1 घण्टा बाद उसमें 10 ग्राम मिश्री और 100 मि. ग्राम भस्म मिलाकर खालें ऊपर से यथा शक्ति गुनगुना दूध पियें। एक खुराक सुबह एक खुराक शाम को लेवें।
नुस्खा नं. 2 आंवले का छिलका 10 ग्राम, हरड़ का छिलका 10 ग्राम, बहेड़े का छिलका 10 ग्राम शुद्ध शिलाजीत 10 ग्राम वंगभस्म 1 ग्राम।
विधि - सबको कूट छानकर पानी में घोटकर झरवेरी बेर के बराबर गोली बना लें। मात्रा एक से दो गोली तक व्यवस्थानुसार गुनगुने पानी या मिश्री मिले हुये दूध के साथ लें।
लाभ - दस्त साफ लाती है और सभी वीर्य दोषों को हरती
नुस्खा नं 3 (नपुंसकता में 40 वर्ष से ऊपर) असगन्ध नगौरी 2 ग्राम, शहद में चटायें और ऊपर से दूध पीने से नपुंसकता दूर होगी। नुस्खा नं. 4 (सुजाक और प्रमेह साथ-साथ होने पर) * ईसबगोल की भूसी 10 ग्राम, आंवले का छिलका 10 ग्राम सहबैरोजा 6 ग्राम, राल सफेद 5 ग्राम, मूसली सफेद 6 ग्राम, गोखरू चौमुखी 10 ग्राम, गोंद बबूल 5 ग्राम, शिलाजीत 5 ग्राम, वंग भस्म 3 ग्राम, मिश्री 200 ग्राम।
विधि - सबको पीसकर कपड़छन कर लें। खुराक एक तोला सुबह व रात को दूध के साथ लें।
लाभ -जिनको सुजाक और आतशक दोनों एक साथ हों उनके लिये रामबाण साबित होगा।
नुस्खा नं. 5. छाल मखाना, इमली के बीजों की मिगी बराबर लेकर तीन बार बरगद के दूध में भिगोकर छाया में सुखा लें और फिर काट छानकर बराबर की मिश्री मिलायें। माशा -4 ग्राम सुबह व शाम को सोते समय दूध के साथ सेवन करें।
लाभ - वीर्य को शरीर में उत्पन्न व गाढ़ा करती है।
नुस्खा नं. 6 सौंठ सतावर गोखरू, चौमुखा, ताल मखाना, बीजबन्द, समद सौख, कोंच के बीज, मूसली सफेद व स्याह वहम्मन सफेद व बाल कंवल गट्टों की मिंगी, चिनियाँ गोंद, आंवले का छिलका, ईसबगोल की भूसी, इन्द्र जौ, मोच रस तलु इचायची छोटी सबको बराबर मिलाकर कपड़छन करें।
इसमें बराबर की मिश्री मिला लें। सोते समय रात को और सुबह 10 तोला गुनगुने दूध के साथ मिश्री मिलाकर खायें। जाड़े के मौसम में शिलाजीत 10 ग्राम, गौभस्म या चिवंगभस्म अथवा सुवर्ण वंग 5 ग्राम डाल लेवें।
लाभ-40 दिन इस दवा का सेवन करने से सम्पूर्ण वीर्य दोष, स्वप्न दोष शीघ्रपतन नपुंसकता आदि दूर होकर शरीर में शक्ति का अदभुत संचय हो जाता है।