
[ 10- चैत्र शुक्ला कामदा एकादशी ]
श्रीकृष्ण भगवान बोले-हे धर्मराज! अब मैं तुम्हें कामदा एकादशी व्रत की कथा सुनाता हूँ जो सब पापों को नष्ट कर पुत्र, स्त्री, धन उधर भटकते हुए विन्ध्याचल पर्वत पर पहुंच गये वहाँ श्रृंगी महात्मा के पैरों में पड़कर अपने दुःख का हाल कह सुनाया और इससे बचने का उपाय बताने की प्रार्थना की। महामुनि ने कहा-तुम चैत्र शुक्ला कामदा एकादशी का व्रत विधि विधान से करना जिससे तुम राक्षस योनि से छूटकर फिर गंधर्व योनि पाओगे। दोनों ने कामदा एकादशी का व्रत किया जिससे पुनः गन्धर्व योनि को प्राप्त कर गन्धर्व लोक को चले गये।
[ 11- वैशाख कृष्णा बरुथनी एकादशी ]
भगवा श्रीकृष्ण जी से युधिष्ठिर बोले हे भगवान! अब आप वैशाख कृष्णा एकादशी का वर्णन कीजिए। भगवान बोले कि यह एकादशी विशेषकर स्त्रियों का कल्याण करने वाली है, इसी एकादशी का व्रत करने से राजा मान्धाता को स्वर्ग मिला था। इस एकादशी के दिन व उससे भी पहले तामसिक भोजन, पराया भोजन तथा स्त्री संग आदि छोड़ देना चाहिए। दुर्व्यसनों, दुष्टों की संगति, क्रोध, झूठ बोलना आदि इस व्रत को करने वालों के लिए वर्जित है। एकादशी का व्रत करने पर रात को जागरण कर भगवती जगदम्बा की पूजा करनी चाहिए। द्वादशी के दिन अन्नदान करना चाहिए क्योंकि अन्न ही प्राणियों का जीवन है, इस एकादशी का व्रत करने से संसार के दुःख नष्ट होते हैं।
[ 12- वैशाख शुक्ला मोहनी एकादशी ]
धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण जी से कहा कि अब आप वैशाख शुक्ला एकादशी के व्रत की कथा सुनाइये। भगवान ने कहा कि यह मोहनी एकादशी कहलाती है। इसके व्रत अनुष्ठान से मानव सांसारिक दुःखों से छूटकर सीधा स्वर्ग को चला जाता है। इसकी कथा यह है कि एक समय चन्द्रनाम का राजा पुरावती नगरी में था उसी नगरी ने धनपाल नामक धर्मात्मा और भगवान का भक्त वैश्य भी रहता था। उसके ५ बेटे थे। उनमें सबसे छोटा बेटा दुराचारी व पापी होने के कारण । पिता ने घर से निकाल दिया था। वह चोरी आदि बुरे कामों में फंसने के कारण राजा के सामने लाया गया। राजा ने उसे शारीरिक दण्ड देकर घनघोर जंगल में छोड़ दिया। वहाँ वह भूख प्यास से व्याकुल होकर भगवान से प्रार्थना करने लगा कि मेरा उद्धार करो, मैं अब कोई भी बुरा काम नहीं करूंगा। तब भगवान की कृपा से उसे कौंडय ऋषि का आश्रम दिखाई दिया वहाँ जाकर उसने ऋषि को प्रणाम किया। महात्मा ने आये हुए अतिथि का पूरा सत्कार कर कन्दमूल खाने को दिए खाने-पीने के बाद उसने महात्मा से प्रार्थना की कि मैं अपने किये हुए कर्मों का फल पा रहा हूँ कृपा कर कोई ऐसा उपाय बतलाने का कष्ट करें जिससे इन दुःखों से निदान हो सके। महामुनि ने कहा वैशाख शुक्ला मोहनी एकादशी को विधिपूर्वक व्रत करने से सब प्रकार के दःख सन्ताप छूट जाते हैं ओर अन्त समय में स्वर्ग मिलता है। वैशाख शुक्ला एकादशी आने पर उसने विधि पूर्वक व्रत किया जिसके प्रभाव से संसार में धन और यश को प्राप्त कर अन्त समय मोक्ष को प्राप्त हुआ।
एकादशी व्रत की कथा का वर्णन