
[ 7- फाल्गुन कृष्णा विजया एकादशी ]
श्रीकृष्ण बोले- इस एकादशी का व्रत करने वालों के सब दुःख छूटकर संसार के सारे सुख अपने आप ही प्राप्त हो जाते हैं। यह एकादशी शत्रुओं को परास्त कर विजय प्राप्त करने वाली है। त्रेता युग में जब श्री रामचन्द्रजी सीताजी को ढूढ़ते हुए समुद्र के नजदीक पहुँचे तब श्री रामचन्द्रजी ने लक्ष्मणजी से कहा कि हमे समुद्र पार करने से पहले किसी बल तथा तप का अनुष्ठान करना चाहिए। यह विचार कर दोनों वहाँ से चार मील दूर महामुनि बकदालभ के आश्रम में पहुंचे और ऋषि को श्रद्धा से दोनों ने प्रणाम किया। मुनि के परिचय पूछने पर श्री राम ने कहा कि हम दोनों अयोध्यापति महाराज दशरथ के सुपुत्र हैं। चौदह वर्ष का वनवास व्यतीत करने के लिए "मेरी पत्नी के साथ हम दोनों भाइयों के जंगल में जाने पर लंका के राजा रावण ने सीता का जबरदस्ती अपहरण कर लिया उनको वापिस छुड़ाने के लिये हमने वानरों के राजा सुग्रीव से नाता जोड़ा है। वे अपनी सेना सहित हमारे साथ सीता को छुड़ाने के लिए समुद्र पार करके जाना चाहते हैं।
फाल्गुन कृष्णा विजया एकादशी
इसलिए आप कोई ऐसा व्रत या अनुष्ठान बतायें जिससे रावण को युद्ध में हराकर हम सीताजी को पुनः प्राप्त कर लेवें। महात्माजी ने कहा- नर श्रेष्ठ आप तो स्वयं विष्णु के साक्षात अवतार हैं और सर्वज्ञ है आपको सब कुछ मालूम है, फिर भी आप यहाँ आदर भाव से आये हैं इसलिए श्रेष्ठ उपवास बताता हूँ। आप दोनों भाई सारी सेना सहित विजया एकादशी का व्रत व अनुष्ठान विधिपूर्वक करो। दशमी के दिन सोने या चाँदी के कलश बनाकर उसमें पंचपल्लव डालकर जल भरकर वेदी पर स्थापित करें। उसके ऊपर सोने या चाँदी की नारायण की मूर्ति बनाकर कलश पर प्रतिष्ठित कर फिर रात भर भगवान नारायण की प्रार्थना कर दूसरे दिन प्रातः स्नान आदि से निबट कर धूप, दाप नवद्य आदि कलश चढ़ाकर नारायण भगवान की श्रद्धा और भक्ति से पूजा कर फिर रात को भगवान नारायण की प्रार्थना करते हुए जागते रहे। द्वादशी के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से शुद्ध होकर कलश, यदि धातु का हो तो ब्राह्मण को दान में दे दें यदि मिट्टी का हो तो उसे नदी या तालाब में गिरा देना चाहिए। नारायण की सोने की मूर्ति भी ब्राह्मण को भेंट कर देनी चाहिए, इस तरह ऊपर कहे अनुसार आप एकादशी व्रत करेंगे तो आप जीतेंगे और आपकी कामना पूरी होगी।श्री कृष्ण जी बोले हे धर्मराज ! महामुनि के बताए हुए नियम से दोनों ने विधिपूर्वक एकादशी का व्रत किया जिससे समुद्र पार करके लंका की लड़ाई में रावण को मारकर सीता को वापिस ले आये फिर दस हजार साल तक अयोध्या में राज्य किया।
फाल्गुन कृष्णा विजया एकादशी