माघ शुक्ला जया एकादशी व्रत की कथा का वर्णन / एकादशी व्रत की कथा

 एकादशी-की कथा ekadashi vrat katha book in hindi pdf

[ 5- माघ शुक्ला जया एकादशी ]

धर्मराज बोले - हे कृष्ण भगवान! अब आप माघ शुक्ला एकादशी व्रत की कथा का वर्णन करो। भगवान बोले हे-धर्मराजा जो माघ सुदी एकादशी का व्रत करता है, वह सब पापों से छूटकर संसार के सब सुखों को भोगता हुआ अन्त में मुक्ति को प्राप्त होता है। इसका व्रत करने वालों को भूत-प्रेत योनि कभी भी नहीं मिलती। इसके करने से सदा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है इसलिए इसका नाम जया एकादशी है। हे धर्मराज! अब मैं जया एकादशी की कथा सुनाता हूँ, ध्यान से सुनो एक समय इन्द्रलोक में देव सभा जुड़ी हुई थी, सुन्दर अप्सराएँ नाच गा रही थीं। उनके साथ ही गन्धर्व पुत्र माल्यवान और गन्धर्व कन्या पुष्पावती नाच गा रही थी। इन्द्रासन पर इन्द्र विराजमान थे चारों तरफ खुशी छाई हुई थी। फूल बरसाये जा रहे थे। इतने में ही गन्धर्व पुत्र माल्यवान और गन्धर्व कन्या पुष्पावती एक दूसरे की सुन्दरता से मोहित होकर प्रेम में आसक्त हो गये और उनका ताल स्वर बिगड़ गया। वे ताल स्वर से रहित होने पर भी नाचते-गाते रहे यह देखकर इन्द्र को बहुत क्रोध आया और बोले तुमने शास्त्र के विपरीत आचरण किया है कि बिना विवाह किये एक दूसरे पर आसक्त हो गये हो विवाह न होने तक पुरुष को चाहिए कि पराई स्त्री को माता व बहिन के समान जाने और स्त्री को चाहिये कि पराये पुरुष को पिता और भाई के समान साझे।

माघ शुक्ला जया एकादशी

तुम दोनों ने आसक्त होकर ताल स्वर भग कर दिया इसलिये मैं तुम्हें श्राप देता हू जिसके प्रभाव से तुम दोनों पृथ्वी पर जाकर पिशाच यान धारण करोगे। इन्द्र द्वारा शाप देने के कारण व दोनों पागलों की तरह हिमालय में विचरण करने का एक दिन भयंकर ठंड पड़ने पर शीत से व्याकुल हो दोनों ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि अब कदापि बुरे कर्म नहीं करेंगे, पराई स्त्री को माँ तथा बहन और पराये पुरुष को पिता व भाई के समान समझेंगे। हम जान गये हैं कि बुराई का फल बुरा और अच्छाई का फल अच्छा मिलता है। अब हम दोनों अच्छे कर्मों का आचरण करते हुये अपना जीवन बितायेंगे। इस प्रकार प्रार्थना तथा प्रायश्चित करते हुये अनजाने में जया एकादशी का व्रत पूरा हो गया। इस व्रत के प्रभाव से मरने पर विमान द्वारा इन्द्रलोक को पहुँचे। वहाँ इन्द्र के पूछने पर माल्यवान पुष्पावती ने बताया कि अनजाने में हमसे जया एकादशी का व्रत हो गया। इसलिये पिशाच योनि से छूटकर हम इन्द्रलोक में आ गये हैं। इन्द्र बोले सही तौर पर तुम दोनों अब बुरे कर्म छोड़कर धर्मात्मा बन गये हो। इसलिये इन्द्रलोक में देव योनि में रहकर सुख प्राप्त कर सकते हो इन्द्र ने सारा प्रबन्ध करके माल्यवान और पुष्पावती का विवाह धूमधाम से करा दिया। धर्मराज युधिष्ठिर बोले-हे योगिराज अब कृपा करके फाल्गुन कृष्णा एकादशी की कथा का वर्णन कीजिए।

माघ शुक्ला जया एकादशी

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