
[ 17- श्रावण कृष्णा एकादशी कामिका एकादशी ]
भगवान बोले-हे धर्मराज! अब मैं श्रावण कृष्णा एकादशी की कथा का वर्णन करूँगा। इसका व्रत करने से मनुष्य सद्गति को प्राप्त होता है। पुत्र, यश, धन, सम्मान भी इस व्रत को करने से मिलता है। इस कामिका एकादशी के व्रत में काम, क्रोध, लोभ मोह, हिंसा, अभिमान, चोरी आदि बुराइयों का त्याग करना चाहिए। जो इस प्रकार विधिपूर्वक कामिका एकादशी का व्रत करता है और संसार में सभी सुखों को भोगता हुआ अन्त में स्वर्ग को भोगता है। इसलिए जिसे संसार के सुख और स्वर्ग की कामना हो वह इस व्रत को अवश्य करें। .१८- [
[ 18- श्रावण शुक्ला पुत्रदा एकादशी ]
धर्मराज बोले- हे भगवान! अब आप श्रावण शुक्ला एकादशी की कथा का वर्णन कीजिए भगवान बोले कि इस एकादशी का नाम पुत्रदा है जिसके पुत्र न हा वह इस व्रत को करने से पुत्र प्राप्त कर सद्गति को पाता है। प्राचीन काल में एक नगर में महजीत नाम का राजा राज्य करता था वह निसन्तान था राज्य में सभी सुख होते हुए भी राजा हमेशा उदास रहता था। एक दिन राजा ने सारी प्रजा को एकत्रित कर अपने मन की बात कही तो प्रजा ने कहा कि हे राजन्। आप अपने कुल गुरु लोमेश ऋषि के पास पहुँचकर अपने मन की व्यथा सुनाये जिससे वे अवश्य कुछ उपाय बतायेंगे तथा जिससे आपका यह महान कष्ट दूर हो जायेगा। राजा ने अपनी प्रजा के साथ लोमेश ऋषि के आश्रम में पहुँचकर उन्हें प्रणाम किया। कुशल मंगल के बाद राजा ने अपने पुत्र न होने का कारण व पुत्र प्राप्ति का उपाय बताने की विनती की। ऋषि ने कहा-हे राजन्! तुम्हारे पिछले जन्म के पाप के कारण तुम्हें पुत्र प्राप्त नहीं हुआ है। तुमने पूर्व जन्म में ब्याही गाय को पानी पीते हुए भगा दिया था इसी कारण तुम्हें पुत्र नहीं हुआ है। इसलिए आगे कभी किसी जीव को मत सताना और पुत्र पाने के लिए यदि श्रावण शुक्ला एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करोगे तो आपके अवश्य पुत्र होगा। राजा ने अपने नगर में आकर मुनि के कथनानुसार श्रावण शुक्ला एकादशी का व्रत किया जिससे उसका पुत्र उत्पन्न हुआ इसलिए पुत्र पाने की इच्छा रखने वाल को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखना चाहिए।
[ 19- भाद्रपद कृष्णा अजा एकादशी ]
युधिष्ठिर बोले-हे भगवन! आप कृपा कर भाद्रपद एकादशी का वर्णन कीजिए।भगवान बोले-हे युधिष्ठिर ! इस एकादशी का व्रत करने से सब पाप छूटकर दूर होते हैं। और अन्त में सद्गति को प्राप्त होता है। इसकी कथा इस प्रकार है कि बहुत समय पहले एक दानी राजा हरिश्चन्द्र हुए थे जिन्होंने अपना राजपाट और धन सम्पदा विश्वामित्र ऋषि को दान में दे दी और आपने चांडाल के घर की नौकरी की थी। उस समय श्मसान भूमि की तरफ गौतम आ गये। राजा ने ऋषि को प्रणाम किया। गौतम ऋषि ने कहा कि किसी पूर्व जन्म के पाप से आपकी यह दशा हुई है। यदि तुम भाद्रपद कृष्णा एकादशी का व्रत करो तो तुम्हारा इस हालत से उद्धार हो जायेगा राजा ने ऋषि की बात मानकर अजा एकादशी का व्रत किया जिससे राजा का मरा हुआ पुत्र फिर जीवित हो गया और उसका राज-पाट उसे वापिस मिल गया। राजा सुख से राज्य करने लगा और अन्त समय मोक्ष को प्राप्त हुआ।
कामिका एकादशी / पुत्रदा एकादशी / अजा एकादशी- की कथा का वर्णन