मार्गशीर्ष शुक्ला मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

 एकादशी-की कथा ekadashi vrat katha book in hindi pdf

[ 2- मार्गशीर्ष शुक्ला मोक्षदा ]

एकादशी व्रत कथा भगवान श्रीकृष्ण से एकादशी का महात्म्य सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर हाथ जोड़कर बोले- हे भगवन! अब भक्तों के लिए मार्गशीर्ष शुक्ला एकादशी का वर्णन कीजिए। - युधिष्ठिर की प्रार्थना सुनकर श्रीकृष्ण जी बोले-हे | धर्मराज! ध्यान लगाकर सुनो। अब संसार में कल्याण के लिए मोक्षदा एकादशी की कथा सुनाता हूँ जिसकी पूजा धूप, मंजरी व तुलसी से होती है।

मार्गशीर्ष शुक्ला मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

वैरवानस नामक राजा ने एक दिन अपने पिता को अनेक रोगों से परेशान और दुःखी हो फूट-फूट कर रोते तथा विलाप करते हुए नरक में पड़े हुए स्वप्न को देखा। अपने पिता की यह हालत सपने में देखने से राजा को बहुत चिंता हुई और वह फिर सो न सका। सवेरा होते ही वह स्नानादि से निपटकर अपने राज्य के श्रेष्ठ मुनियों की शरण में जाकर रोते हुए हाथ जोड़कर स्वप्न में देखे हुए अपने पिता का हाल बताया और अपने पिता का इस हाल का कारण पूछा। ऋषियों में श्रेष्ठ पर्वत ऋषि ने राजा का विनम्र सपना सनकर क्षणभर के लिये ध्यान लगाया। फिर राजा से बोले कि तुम्हारे पिता ने वद्धावस्था में कमजोर और शक्तिहीन होते हुए भी दो स्त्रियों से विवाह किया जिसमें से एक के साथ प्रेम करते हुए सुख भोगा करते थे और दूसरी से सारे जीवन बात तक नहीं की। इसी पाप के कारण तुम्हारे पिता को यह महान कष्ट भोगना पड़ रहा है यदि उनकी रक्षा का उपाय नहीं किया गया तो उन्हें और भी कष्ट उठाना पड़ेगा क्योंकि एक स्त्री के रहते हुए दूसरा विवाह करना संसार में महापाप है ऋषि की बात सुनकर राजा ने हाथ जोड़कर कहा-महामुनि किस धर्म, दान और व्रतादि के करने से मेरे पिता इस महान कष्ट से परेशान न हों सो तुरन्त प्रकट करे।

मार्गशीर्ष शुक्ला मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज से कहा कि इस तरह राजा की प्रार्थना पर महामुनि ने कहना शुरु किया कि हे राजन्! मार्गशीर्ष शुक्ला एकादशी को नियमपूर्वक व्रत करे और यह प्रण करे कि मैं एक स्त्री के रहते हुए दूसरी शादी नहीं करूँगा और प्रजा के किसी आदमी को ऐसा करने की सहमति नहीं दूंगा यदि इस तरह किया तो तुम्हारे पिता का नरक से उद्धार हो जायेगा और परमात्मा की दया से सुखों को प्राप्त करेगा। हे युधिष्ठिर! राजा ने मुनि को दण्डवत प्रणाम किया और वहाँ से अपने नगर को आकर विधिपूर्वक एकादशी का व्रत किया जिसके प्रभाव से उसके पिता कष्ट और दुःखों से छूटकर राजा को आशीर्वाद देता हुआ स्वर्गलोक को प्राप्त हुआ।


मार्गशीर्ष शुक्ला मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

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