सुमित्रानन्दन पन्त का जीवन परिचय
Life of Sumitranandan Pant
सुमित्रानंदन पंत का जन्म सन 1900ई. में अल्मोड़ा के निकट कौसानी ग्राम में हुआ था |जन्म के 6 घंटे बाद ही इनकी माता का शरीर शान्त हो गया | इनका लालन पालन प्रकृति की गोद में हुआ , प्रारंभिक शिक्षा ग्राम की पाठशाला में हुई | हाईस्कूल की परीक्षा
वाराणसी से पास करके ,पन्त प्रयाग की म्योर सेंट्रल कॉलेज में प्रविष्ट हुए | किंतु सन् 1921 में असहयोग आंदोलन प्रारंभ होने पर इन्होंने कॉलेज छोड़ दिया और साहित्य साधना में प्रवृत्त हुए तथा दीर्घ काल तक हिंदी साहित्य की निरंतर सेवा की|
28 दिसंबर 1977 को इनका देहावसान हो गया |
साहित्य अकादमी ने विशिष्ट साहित्य सेवा के लिए इन्हे पुरस्कृत किया तथा भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण अलंकार से सम्मानित किया | इनकी कृति चिदंबरा पर भारतीय ज्ञानपीठ का एक लाख रुपए का पुरस्कार प्रदान किया गया |
इनकी प्रमुख रचनाएं हैं- वीणा, ग्रंथि, पल्लव, पल्लविनी, अतिमा, गुंजन, युगांत, युगवाणी, ग्राम्या, स्वर्ण किरण, स्वर्णधूलि, उत्तरा, कला और बूढ़ा चांद, युगपथ, शिल्पी, चिदंबरा, ऋता, लोकायतन, रश्मिबन्ध आदि |
प्रसाद तथा निराला की भांति पंत भी छायावाद के आधार स्तंभ है | छायावाद अपने पूरे सौंदर्य और समृद्धि के साथ पंत के काव्य में प्रकट हुआ है | ये प्रकृति के सुंदर, संजीव, मनोरम दृश्य अंकित करने में सिद्धहस्त हैं , अतः इन्हें प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है |
पंत के काव्य जीवन की यात्रा के स्पष्टतः तीन सोपान माने जा सकते हैं |
1. छायावादी काव्य रचनाएं
2. प्रगतिवादी काव्य तथा
3. श्री अरविंद के दर्शन से प्रभावित होने के पश्चात की अन्तश्चेतनावादी, आध्यात्मिक कविताएं जहां ये मानवतावाद के सच्चे समर्थक के रूप में प्रकट हुए हैं |
पंत के काव्य में मानवता के प्रति सहज आस्था है |
यह एक नवीन सुंदर सूखी समाज की सृष्टि के प्रति आशावान हैं | विश्व बंधुत्व और भाृतृत्व के प्रति आशावादी स्वर ही इनके काव्य को उदात्त बनाता है | काव्य कला के प्रति पन्त विशेष सचेष्ट हैं | इनकी भाषा चित्र मई एवं अलंकृत है तथा स्पष्ट सशक्त बिम्ब योजना ने उसे अत्यंत प्रभावमयी बना दिया है | संक्षेप में सुंदर, सुकुमार भावों के चतुर चितेरे पन्त ने खडी बोली को ब्रजभाषा जैसा माधुर्य एवं सरसता प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है | पंत जी गंभीर उत्कृष्ट कवि और मानवता के सहज आस्थावान कुशल शिल्पी हैं जिन्होंने नवीन दृष्टि के अभ्युदय की कल्पना की है |
सुमित्रानन्दन पन्त का जीवन परिचय
Life of Sumitranandan Pant