रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय व रचनाएँ / Biography of Ramdhari Singh Dinkar in Hindi

  रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय व रचनाएँ 
Biography of Ramdhari Singh Dinkar in Hindi
  रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय व रचनाएँ   Biography of Ramdhari Singh Dinkar in Hindi
दिनकर का जन्म सन 1908 ईस्वी में बिहार प्रांत के मुंगेर जिले के सिमरिया गांव में हुआ था | इनके पिता अत्यंत साधारण स्थिति के किसान थे | दिनकर जब केवल 2 साल के थे तभी इनके पिता जी का स्वर्गवास हो गया था उनकी विधवा माता ने इनकी शिक्षा का प्रबंध किया | पटना विश्वविद्यालय ने सन 1932 ईस्वी में इनको बीए ( ऑनर्स) की परीक्षा उत्तीर्ण की थी ! यह बड़े मेधावी छात्र थे |

छात्र जीवन में ही इनमें कविता के संस्कार अंकुरित हो गए थे | 

हाई स्कूल पास करने के बाद ही इनकी 'प्राण भंग' नामक पुस्तक प्रकाशित हो गई थी | दिनकर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक से लेकर बिहार सरकार के अधीन सब रजिस्ट्रार , प्रचार विभाग के उपनिदेशक , मुजफ्फरपुर कॉलेज में हिंदी विभागाध्यक्ष, राज्यसभा की सदस्य तथा भागल विश्व विद्यालय के उपकुलपति तक रहे थे | भारत सरकार द्वारा ये पद्म भूषण से भी अलंकृत हुए थे |

 1974 ई. में इनका स्वर्गवास हो गया |

इनकी रचनाओं में- रेणुका, द्वन्दगीत, हुकांर, रसवंती, चक्रवाल, धूप-छांह, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, सामधेनी , नील कुसुम, सीपी और शंख , उर्वशी, परशुराम की प्रतीक्षा और हारे को हरिनाम कविता पुस्तकें तथा संस्कृति के चार अध्याय, अर्धनारीश्वर , रेती के फूल तथा उजली आग आदि गद्य पुस्तकें प्रमुख हैं | इनका गद्य भी उच्च कोटि का तथा प्रांजल है | राष्ट्र कवि के रूप में प्रसिद्धि इन्हें रेणुका से ही प्राप्त हो गई थी | उर्वशी (महाकाव्य) पर इन्हें एक लाख रुपए का ज्ञानपीठ पुरस्कार भी प्रदान किया गया था |
दिनकर की कविताओं में अतीत के प्रति प्रेम तथा वर्तमान युग की दयनीय दशा के प्रति असंतोष है | इनका मुख्य विषय अतीत का गौरव गान है तथा प्रगति और निर्माण के पथ पर अग्रसर होने का संदेश देना है |

इनकी कविता में गरीबों के प्रति सहानुभूति और पूंजीवाद के प्रति विरोध की भावना भी है | 

दिनकर कि अधिकांश कविताओं में राष्ट्रीयता की भावना है तथा कुछ कविताओं में विश्व प्रेम की झलक है |
इनके काव्य में सभी रसों का समावेश है पर वीर रस की प्रधानता है |चित्रण भावपूर्ण तथा कविता का एक एक शब्द आकर्षक होता है  | रचनाएं खड़ी बोली में है | भाषा में संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ उर्दू फारसी के प्रचलित शब्दों में प्रयोग भी मिलता है | इन्होंने अधिकतर आधुनिक छदों का प्रयोग किया है | नवीन चेतना और जनमानस में देशभक्ति की लहरें उठाने वाले दिनकर अपने युग में प्रतिनिधि कवि थे |
  रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय व रचनाएँ 
Biography of Ramdhari Singh Dinkar in Hindi

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