उड़ने वाला लकड़ी का घोड़ा,कहानी हिन्दी/kahani in hindi for kids

कहानी➡उड़ने वाला  लकड़ी का घोड़ा

उड़ने वाला  लकड़ी का घोड़ा,कहानी हिन्दी/kahani in hindi for kids
उड़ने वाला  लकड़ी का घोड़ा,कहानी हिन्दी/kahani in hindi for kids
kahani in hindi for kids
एक राजा के राज्य में एक कुम्हार व एक बढ़ई यह दो बहुत ही बुद्धिमान व प्रतिभाशाली व्यक्ति थे, दोनों में बहुत गहरी मित्रता थी और वे दोनों एकांत खेत की मेड़ में बैठकर घंटों चर्चा किया करते थे कि हम अपनी कला के माध्यम से और क्या बेहतर कर सकते हैं | 

उन दोनों व्यक्तियों को रोज इस तरह बैठकर घंटों चर्चा करते देख मंत्री ने इस बात की सूचना राजा को दी राजा ने आदेश दिया कि दोनों व्यक्तियों को दरबार में पेश किया जाए | 

वह दोनों मित्र कुम्हार व बढ़ई दरबार में हाजिर हुए और राजा से बोले हुजूर आज्ञा करें ? राजा ने पूछा क्या बात है तुम दोनों एकांत में बैठ घंटों किस बात पर चर्चा करते हो ? कई सालों से हमारे मंत्री तुमको देख रहे हैं,  कुमार ने सबसे पहले बताया कि महाराज मैम मिट्टी का ऐसे घड़ी का बनाने पर चर्चा कर रहा था कि ठंड के समय में उसका पानी गर्म रहे गर्म में ठंड रहे | 

फिर कुम्हार बोला हुजूर में अपनी कला के द्वारा एक लकड़ी का ऐसा घोड़ा तैयार कर सकता हूं जो आकाश में उड़ सकता है | राजा कुम्हार की कला से प्रभावित हुआ उसने आदेश दिया कि तुम वह लकड़ी का घोड़ा तैयार करो तुम्हें मुंह मांगा इनाम दिया जाएगा |

 कुम्हार ने कुछ ही समय में वह घोड़ा तैयार कर दिया और राजा के सामने उस घोड़े को आकाश में उड़ा कर दिखाया राजा प्रसन्न हो गया कुम्हार ने राजा को घोड़े को उड़ाने के बारे में बताया कि महाराज इसमें तीन बटन लगी है पहली बटन से ऊपर जाएगा घोड़ा दूसरी बटन से सीधे और तीसरी बटन से पुनः नीचे |  

राजा ने उस घोड़े के ऊपर बैठ उड़ान भरी तब उस राजा के इकलौते पुत्र ने जब देखा तो उसने भी उस घोड़े पर बैठने की इच्छा प्रकट की, राजा से कहा तो उसने प्रसन्न होकर आज्ञा दिया जाओ बेटा यह तुम्हारे लिए ही है वह पहली बटन दबाया तो ऊपर की तरफ जाने लगा दूसरी बटन से सीधे और तीसरी बटन कि उसे सुध ही भूल गई , तो वह कई राज्य देशों को पार कर गया तब उसे सुध आयी तीसरी बटन कि वह उसे दबाया और नीचे आया |

 रात का समय था कोई दूसरा राज्य और सुनसान जगह थी, वह पास में एक झोपड़ी को देख वह वहां गया तो एक बूढ़ी माता थी उसने देखा कि यह बालक तो कोई राजकुमार सा जान पड़ता है उसने बड़े प्यार से उसे भोजन कराया और रात को उसी झोपड़ी में विश्राम करने को कहा।

तो राजकुमार भी रात को वहां रुकना उचित समझा और जैसे हि वह सोने वाला था कि पूरा नगर रोशनी से जगमगा उठा , उसने इसके विषय में बूढ़ी माता से पूंछा तो उसने बताया कि बेटा इस राज्य का जो राजा है उसकी एक बेटी है और वह विलक्षण है प्रत्येक रात्रि में उसको तराजू में तौला जाता है, एक तरफ एक फूल और दूसरी तरफ वह राजकुमारी और आश्चर्य की बात है कि दोनों पढ़ले तराजू के बराबर रहते हैं | वही राजकुमारी जब अपने बिस्तर पर सोती है तो नगर रोशनी से जगमगा उठता है |

राजकुमार उस अद्भुत राजकुमारी के विषय में सुना तो उसे देखना चाहा रात्रि में उठकर उड़ने वाले घोड़े पर बैठकर राजकुमारी के पास पहुंचा और जब राजकुमारी के अनुपम सुंदरता को देखा तो मोहित हो गया और उससे विवाह करना चाहा |

उस दिन वह सोते हुए राजकुमारी की चप्पलों को बदल दिया अपने चप्पलों से और जब दूसरे दिन उसे तोलने के लिए उपस्थित किया गया तो एक फूल की जगह दो फूल चढ़े , राजा ने सोचा कोई बात नहीं बेटी बड़ी हो रही है, तो एक फूल का वजन बढ़ गया | और दूसरे दिन में राजकुमार पुनः आया अपनी साॅल उसे उढ़ा दिया उसकी खुद ओढ़ लिया |

दूसरे दिन तौलने पर एक टोकरी फूल चढ़े | तब राजा ने समझा कि जरूर कोई राजकुमारी के पास आता है ? उसके आदेश पर सैनिकों ने राजकुमारी के पलंग के बगल से दस - पन्द्रह हांथ गहरा गड्ढा खोदा और उसके चारों तरफ अंगारे रख रखा दिया तथा दुर्लभ इत्र  गड्ढे में भरवा दिया और उसके ऊपर एक खाट बिछाया जो कच्चे सूत से बुनी हुई थी ,ऊपर से एक रेशमी वस्त्र डाल दिया गया कि जो आयेगा और इसमें बैठेगा तो सीधे गड्ढे में गिर जाएगा और  जो चारों तरफ जलते अंगारे हैं उसकी वजह से ऊपर भी नहीं चढ़ पाएगा ,अगर किसी प्रकार ऊपर आ भी गया तो यह अति दुर्लभ इत्र की महक से पकडा जाएगा |

यह तैयारी करके सभी अपने अपने कार्य में लग गए | राजकुमार रात्रि में पुनः आया और राजकुमारी के बगल से एक बिस्तर लगा देखा तो खुश हो गया कि राजकुमारी मेरे लिए भी बिस्तर लगा कर रखी है , वह जैसे ही बिस्तर पर बैठा सीधे गड्ढे पर चला गया .
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बस  उसकी बुद्धिमानी यह थी कि वह घोड़े के सहित उसे बिस्तर पर गया था तो वह घोड़े के सहारे उस गड्ढा से निकलकर बाहर आया और उन वस्त्रों को उतार कर एक धोबी को दिया कि इसे धुल कर  दो |

 जब उस धोबी ने उन वस्तुओं को छुआ और दिव्य इत्र की सुगंध उसके मन को भा गई उसी रात्रि में नगर के  सेठ के यहां विवाह कार्यक्रम था उस धोबी का भी आमंत्रण था , धोबी ने वही राजकुमार वाली सुगंधित वस्त्र पहन कर गया जहां राजा के सैनिक उसे पकड़ लिए की यही है जो राजकुमारी के यहां रात्रि में आता है |

राजा के पास उसे ले जाया गया राजा के पूछने पर उसने सारी घटना बताई कि यह वस्त्र मेरे पास कैसे आए, राजा सच को सुनकर उसे छोड़ दिया |

बेटी का विवाह तुरंत करने का मन बनाया एक राजकुमार को ढूंढ कर उसके साथ विवाह तय कर दिया, यहां जब राजकुमार को पता चला कि राजकुमारी का विवाह किसी दूसरे के साथ हो रहा है , तो वह रात्रि में आया राजकुमारी  का हांथ पकड़कर अपने घोड़े में बिठाल कर चलने लगा राजकुमारी का विवाह तय हो चुका था उसने मन में विचार किया कि मेरे जाने से पिता की बड़ी बदनामी होगी तो उसने झूठ बोला कि मेरी एक बहुत कीमती वस्तु छूट रही है मैं तुम्हारे साथ चलूंगी लेकिन मुझे नीचे उतारो मैं वह वस्तु लेकर जल्द ही तुम्हारे पास आऊंगी, तुम यहीं पास मिलना |

राजकुमार राजकुमारी की झूठी बातों में आ गया उसने उसको नीचे उतारा राजकुमारी अपने घर चली गई और यहां राजकुमार अपने घोड़े के साथ राजकुमारी के इंतजार ही करते रह गया |

 उसने सुना कि राजकुमारी की आज बारात आ रही तो जहां से बरात आने वाली थी उसी रास्ते पर वह उदास बैठा हुआ था पास में हंस और हसिंन दोनों ने जब उदास राजकुमार को देखा तो दया आ गई उन्होंने कहा कि तुम इस पेड़ से तीन पत्ती तोड़ लो पहली पत्ती खाओगे तो  बच्चे हो जाओगे ,दूसरी पत्ती खाने से जवान जिस प्रकार हो उसी प्रकार और तीसरी पत्ती खाने से बूढ़े हो जाओगे |

राजकुमार तीनों पत्तियों को अपने पास रखा और तीसरी पत्ती का थोड़ा सा भाग उसने खा लिया जिससे बूढ़ा हो गया | बारात आई उसने उनसे बारातियों से आग्रह किया कि मुझे भी बरात ले चलो और बारातियों ने कहा कि वहां तुम्हारा क्या काम है ? उन्हीं बारातियों में से किसी एक बराती ने कहा ठीक है इस बूढ़े को ले चलो यह पान लगाने के काम में आएगा |

बरात के साथ वह राजकुमार आया पान लगाने का काम उसको मिला था, उसने सभी पानों में बूढ़ होने वाली वह तीसरी पत्ती का थोड़ा थोड़ा सा भाग मिला दिया और पान तो सभी खाते हैं दूल्हा तक |

 तो सभी ने पान खाया और बूढ़े हो गए , राजकुमार पुनः दूसरी पत्ती खाकर उसी तरह जवान हो गया और राजकुमारी को घोड़े पर बिठाकर अपने राज्य को चला गया |

यहां जो बराती थे अपने अपने घर गए वहां भी उनको जगह नहीं मिली उनकी पत्नियां मारपीट कर वहां से भगा दिया कि हमारे पति तो बरात लेके गए हैं , वह नौजवान हैं ? तुम बूढे कहां से आ गए ,,,
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 लकड़ी का घोड़ा कहानी बस इतनी ,,

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