प्रेरणादायक कहानी हिंदी-क्रोध का नाश
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| ( प्रेरणादायक कहानी ) |
क्रोध का नाश- एक वृद्ध अनुभवी संत के समीप एक युवक विरक्त होकर पहुंचा वैराग्य सच्चा था कहीं कोई कामना कोई विषयासक्ति रही नहीं थी | भगवत भजन की प्रबल इच्छा थी, वृद्ध संत ने एक ही दृष्टि में यह सब समझ लिया | युवक उनके चरणों में गिरकर प्राथना कर रहा था मुझे अपने श्री चरणों में स्थान दें |
वृद्ध संत ने कहा तुम स्नान करके पवित्र होकर आओ युवक स्नान करने लगा और वृद्ध संत ने आश्रम के पास झाड़ू देती भंगिन को पास बुलाया |
वे बोले जो नया साधु अभी स्नान करने गया है जब वह लौटने लगे तब तुम इस प्रकार मार्ग पर झाड़ू लगाना जिससे उसके ऊपर उठकर धूल पड़ जाए, लेकिन तनिक सावधान रहना वह मारने भी दौड़ सकता है |
भंगिन जानती थी कि वृद्ध संत सच्चे महात्मा हैं , वह देखती थी कि अच्छे विद्वान और दूसरे साधु उनके पास उपदेश पाने की इच्छा से आते हैं उसने आज्ञा स्वीकार की |
युवक स्नान करके लौटा भंगिन जानबूझकर तेजी से झाड़ू लगाने लगी धूल उड़कर युवक पर पड़ी और क्रोध के मारे वह पास पड़ा पत्थर उठाकर मारने झपटा , भंगिन असावधान नहीं थी, वह झाडू फेंक कर दूर भाग गयी |
जो मुख में आया युवक बकता रहा, दोबारा स्नान करके वह महात्मा के पास लौटा, संत ने उससे कहा अभी तो तुम पशु के समान मारने दौड़ते हो भगवान का भजन तुमसे अभी कैसे होगा ? अच्छा एक वर्ष बाद आना तथा एक वर्ष तक नाम जप करते रहो |
युवक का बैराग्य सच्चा था भजन की इच्छा सच्ची थी, संत में श्रद्धा भी सच्ची थी | भजन करके एक वर्ष पूरा होते ही वह फिर संत के समीप उपस्थित हुआ, उसे फिर स्नान करने कि आज्ञा मिली वह स्नान करने गया तो संत ने फिर भंगिन को बुलाकर आदेश दिया वह साधु फिर आया है इस बार मार्ग में इस प्रकार झाड़ू लगाना कि जब वह पास आ जाये तो झाड़ू की एकाद सींक उसके पैरों से छू जाए, डरना मत वह मारेगा नहीं कुछ कहे तो चुपचाप सुन लेना |
भंगिन को आज्ञा पालन करना था स्नान करके लौटते हुए युवक के पैर से भंगिन की झाड़ू छू गई , एक वर्ष की प्रतीक्षा के पश्चात वह दीक्षा लेने जा रहा था और यह दुष्ट भंगिन फिर बाधा दी इसने ,,,,
युवक को क्रोध बहुत आया किंतु मारने की बात उसके मन में नहीं आई वह केवल भंगिन को कुछ कठोर वचन कह कर फिर स्नान करने लौट गया |
जब वह संत के पास स्नान करके पहुंचा संत ने कहा अभी भी तुम भोंकते हो, एक वर्ष और नाम जप करो तब यहां आओ , एक वर्ष और बीता युवक संत के पास आया उसे पूर्व के समान स्नान करके आने की आज्ञा मिली संत ने भंगिन को बुलाकर कहा इस बार जब वह स्नान करके लौटे अपनी कूड़े की टोकरी उड़ेल देना उस पर पर देखना टोकरी में केवल कूड़ा कचरा ही हो कोई गंदी चीज ना हो |
भंगिन डरी किंतु संत ने उसे आश्वासन दिया वह कुछ नहीं कहेगा | आप समझ सकते हैं--
युवक के ऊपर जब भंगिन ने कूड़े की टोकरी उड़ेली युवक ने क्या किया ? ना वह मारने दौड़ा, ना रुष्ट हुआ |
वह भंगिन के सामने भूमि पर मस्तक टेककर प्रणत हो गया और फिर हाथ जोड़कर बोला माता तुम ही मेरी गुरु हो तुमने मुझ पर बड़ी कृपा की तुम्हारी ही कृपा से मैं अपने बड़प्पन के अहंकार और क्रोध को जीत सका, दुबारा स्नान करके युवक जब संत के पास पहुंचा संत ने हृदय से लगा लिया बोले अब तुम भजन के सच्चे अधिकारी हो |