हमारी गौ माता !
गौमाता का संरक्षण जरूरी
गौ माता की महिमा को जानें
➡ भगवान नारायण की कृपा से अनादि काल से चला आ रहा यह सनातन धर्म , जिसमें हमारी गौ माता को हमेशा से ही उच्च स्थान माता का दर्जा प्रदान किया गया है | क्योंकि गैया मैया का दूध अमृत से बढ़कर है और जब मनुष्य इसका सेवन करता है तो सात्विकता को प्राप्त होता है | हमारे ऋषियों ने तथा देवताओं ने नेति-नेति इनकी महिमा का गान किया और साक्षात् भगवान नारायण श्री कृष्ण रूप में आकर इनकी खूब सेवा करी | मित्रों ,, गौमाता हमें कल्याण प्रदान करने वाली हैं , अगर मनुष्य नियमित पंचगव्य ( दुग्ध,दधि,घृत,गोमूत्र,गोबर ) इसका पान करें तो इसके आसपास भी कभी रोग नहीं भटकेगें |
हमारे वैज्ञानिकों ने भी माना कि गाय के गोबर गोमूत्र में अनंत शक्ति- ऊर्जा विद्यमान है | जो मनुष्यों के लिए बहुत कल्याणकारी है | तब दुग्ध,दधि,घृत का तो कहना ही क्या | मनुष्यों की तो बात छोड़िए स्वयं देवता लोग गाय के घी और दूध से बने पकवान के लिए सदा लालायित रहते हैं और हवन के माध्यम से जब घी की आहुति प्राप्त करते हैं , तो देवता बड़े प्रसन्न होते हैं तथा जीवो की सभी मनोकामनाएं को पूर्ण कर देते हैं | मित्रों गैया मैया के अंदर सभी देवता का वास होता है , अगर आप मात्र गैया मैया की सेवा कर रहे हैं तो आपको फिर किसी भी देवता की पूजा करने की जरूरत नहीं होती | क्योंकि सभी की पूजा हो जाती है उससे |
गाय विश्व की माता है उसी के कारण सभी जीवो को जीवन प्राप्त है , लेकिन हम मनुष्यों का बड़ा दुर्भाग्य है - या यूं कहें कि हम लोग नितांत अभागे हैं तो गलत नहीं होगा |अरे जिन गैया मैया की पूजा और सेवा अनादिकाल से होती चली आ रही है, हम लोग कहीं ना कहीं उस मार्ग से च्युत हो गए हैं |

समुद्र मंथन में जब गौ माता का प्रादुर्भाव हुआ तो हमारे ऋषियों ने उनकी सेवा करने को आंगे बढे़, गय्या मय्या की भगवान कन्हैया ने सेवा करी |लेकिन आज हमारा दुर्भाग्य जो कि हम गो सेवा को भूल गए और हमारी गौ माता को दर-दर भूखा प्यासा भटकना पड़ रहा है | मित्रों यह अटल सत्य है | कि हम चाहे विश्व शांति के लिए कितने भी अभियान या आयोजन करें | कभी भी हमें शांति प्राप्त नहीं होगी जब तक हमारी गायों को सम्मान प्राप्त नहीं हो , जब तक हम उनकी सेवा सुश्रुषा नहीं करेंगे | हमारी गौ माता को इस समय सेवा और संरक्षण की आवश्यकता है और यह कार्य मैं तथा आप सब ,मतलब हम सभी को करना है | हमारा दायित्व है और जिस दिन हमारी गौ माता की दयनीय दशा जो हम अभागे लोग करके रखे हैं, उसे सही कर दिया तो उस दिन हमारा देश ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व में शांति और प्रसन्नता व्याप्त हो जाएगी | हम सभी को अपने हृदय में संकल्प लेना होगा कि हम सब गायों को सुरक्षित तथा खुशहाल करके दम लेंगे |
गौ की महिमा को जानें !
( स्कन्द पुराण,आव•रे• १३|६२-६५ )
➡ गौओं की परिक्रमा करनी चाहिए | वे सदा सबके लिए वंदनीय हैं | गौएँ मंगलका स्थान हैं, दिव्य हैं | स्वयं ब्रह्माजी ने इन्हें ( दिव्य गुणों से विभूषित ) बनाया है | जिनके गोबर से ब्राह्मणों के घर और देवताओं के मंदिर भी शुद्ध होते हैं , उन गौओं से बढ़कर पवित्र अन्न किसको बतावें |गौ मूत्र, गोबर, दूध ,दधी और घी-- ये पांच वस्तुएं पवित्र हैं और संपूर्ण जगत को पवित्र करती हैं | गायें मेरे आगे रहें, गाय मेरे पीछे रहें, गायें मेरे हृदय में रहें और मैं गायों के मध्य में निवास करूँ
गौ को ग्रास देने का महत्व
स्कंद पुराण,रेवाखण्ड-६६-६९
➡ जो प्रतिदिन तीनों संध्या के समय नियम परायण एवं पवित्र होकर( गावो चागृतो नित्यम् ) इत्यादि श्लोक का पाठ करता है | वह सब पापों से मुक्त होता और स्वर्ग लोक में जाता है | प्रतिदिन स्वयं भोजन न करके पहले भक्ति भाव से गौओं को गौग्रास देने में श्रद्धा रखनी चाहिए | जो ऐसा करता है उसकी कभी दुर्गति नहीं होती | जो प्रतिदिन गौग्रास अर्पण करता है ,उसने अग्निहोत्र कर लिया, पितरों को तृप्त कर दिया और देवताओं की पूजा भी संपन्न कर ली |गौ-ग्रास देते समय प्रतिदिन इस मन्त्रार्थ का चिंतन करे-- सुरभि की पुत्री गो जाति संपूर्ण जगत के लिये पूज्य है, वह सदा विष्णुपद में स्थित है और सर्वदेवमयी है, मेरे दिए हुए इस गौग्रास को देखें और ग्रहण करें |
गौ के सताने और सेवा करने का फल !
पद्मपुराण पाताल खंड -३०|२७-३०
➡ यदि घरमें प्यासीहुयी गाय बँधी रहे, कन्या रजस्वला हो कर भी अविवाहित रहे तथा देवता के विग्रह पर पहले दिन का चढ़ाया हुआ निर्माल्य पडा रहे तो ये सभी दोष पहले किये हुये पुण्य को नष्ट कर डालते हैं | जो मनुष्य घांस चरती हुई गौ को रोकता है ,उसके पूर्वज पितर पतनोन्मुख होकर काँप उठते हैं | जो मूढ़बुद्धि मानव गौको लाठी से मारता है, उसे हाथों से हीन होकर यमराज के नगर में जाना पड़ता है | जो गाय के शरीर के डांस और मच्छरों को हटाता है ,उसके पूर्वज कृतार्थ होकर अधिक प्रसन्नता के कारण नाच उठते हैं , और कहते हैं हमारा यह वंशज बड़ा भाग्यवान हैं , अपनी गौ सेवक के द्वारा हमें तार देगा |
गोचर भूमि के बारे में जानें !
पद्म पुराण सृष्टि खंड-५६|३७,३९-४१
➡ जो गोचर भूमि छोड़ता है, वह कभी स्वर्ग से नीचे नहीं गिरता | गोदान करने वालों की जो गति होती है , वही उसकी भी गति होती है | जो मनुष्य यथाशक्ति गोचर भूमि छोड़ता है, उसे प्रतिदिन दिन सौ से भी अधिक ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य होता है | जो पवित्र वृक्ष और गोचर भूमि का उच्छेद करता है, उसकी इक्कीस पीडियां रौरव नर्क में पकायी जाती हैं |गांव के गोपालक को चाहिए कि गोचर भूमि को नष्ट करने वाले मनुष्य का पता लगाकर उसे दंड दे |
गौमाता का संरक्षण जरूरी
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